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  ईश्वर जगत के नियन्ता है और इसका प्रमाण ब्रह्माण्ड की सुव्यवस्थित रचना एवम् इसमें नियम से घटित होने वाली वो घटनाएँ है जो कि बिना किसी नियन्ता के संभव नहीं है। कुछ लोग अल्पज्ञानवश ईश्वर को एक कल्पना मात्र मानते है परन्तु विद्वान तथा बुद्धिमान लोग ईश्वर में पूर्ण विश्वास करते है। परमेश्वर  वह सर्वोच्च परालौकिक शक्ति है जिसे इस  संसार  का सृष्टा और शासक माना जाता है। हिन्दी में ईश्वर को  भगवान ,  परमात्मा  या  परमेश्वर  भी कहते हैं। अधिकतर धर्मों में परमेश्वर की परिकल्पना  ब्रह्माण्ड  की संरचना करने वाले से जुड़ी हुई है।  संस्कृत  की ईश्  धातु  का अर्थ है- नियंत्रित करना और इस पर वरच् प्रत्यय लगाकर यह शब्द बना है। इस प्रकार मूल रूप में यह शब्द नियंता के रूप में प्रयुक्त हुआ है। इसी धातु से समानार्थी शब्द ईश व ईशिता बने हैं। [1] नाम  यहोवा  इब्रानी में ईश्वर सर्वव्यापी है, मानो तो संसार मे हर जगह,कण-कण में ईश्वर है। ईश्वर एक विश्वास है , आशा है, मन है ,शांति भी है । My Lord, I consider Your Lordship to be ...